ULLAS Nav Bharat Saaksharta Karyakram: उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम क्या है? जानें इसके उद्देश्य, पात्रता, प्रमुख घटक, डिजिटल ऐप, लाभ और आजीवन शिक्षा से जुड़ी पूरी जानकारी...

ULLAS Nav Bharat Saaksharta Karyakram उल्लास: शिक्षा किसी भी देश के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास का आधार है। साक्षरता व्यक्ति को पढ़ने-लिखने के साथ-साथ अपने अधिकारों, कर्तव्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने में सक्षम बनाती है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने ULLAS – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम (नव भारत साक्षरता कार्यक्रम) शुरू किया है। इसका लक्ष्य उन वयस्कों को बुनियादी साक्षरता और जीवनोपयोगी शिक्षा प्रदान करना है, जो किसी कारणवश औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर सके।
यह कार्यक्रम केवल पढ़ना-लिखना सिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य लोगों को वित्तीय, डिजिटल और कानूनी जानकारी देकर उन्हें आत्मनिर्भर तथा जागरूक नागरिक बनाना भी है।
ULLAS क्या है?
ULLAS का पूरा नाम Understanding of Lifelong Learning for All in Society है। हिंदी में इसे समाज में सभी के लिए आजीवन सीखने की समझ के रूप में समझा जा सकता है।
ULLAS – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की एक केंद्र प्रायोजित योजना है। इसे वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2026-27 की अवधि के लिए लागू किया गया है। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की सिफारिशों के अनुरूप गैर-साक्षर वयस्कों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने पर केंद्रित है।
इस कार्यक्रम में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के उन लोगों को प्राथमिकता दी जाती है, जो पर्याप्त बुनियादी साक्षरता प्राप्त नहीं कर सके हैं।
ULLAS कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य
ULLAS Nav Bharat Saaksharta Karyakram के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
- बुनियादी साक्षरता: वयस्कों को पढ़ना, लिखना और सामान्य गणना करना सिखाना।
- वित्तीय साक्षरता: बैंकिंग, बचत, डिजिटल भुगतान और वित्तीय लेन-देन की जानकारी देना।
- डिजिटल साक्षरता: मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं का सुरक्षित उपयोग करना सिखाना।
- कानूनी साक्षरता: नागरिकों को उनके अधिकारों, कर्तव्यों और कानूनी प्रक्रियाओं की बुनियादी जानकारी देना।
- स्वास्थ्य एवं जागरूकता: स्वास्थ्य, स्वच्छता, पोषण और परिवार कल्याण के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
- व्यावसायिक कौशल: जीवन और रोजगार में उपयोगी कौशल विकसित करने के अवसर देना।
- आजीवन शिक्षा: लोगों में निरंतर सीखने और अपने ज्ञान को बढ़ाने की प्रवृत्ति विकसित करना।
ULLAS कार्यक्रम की प्रमुख तत्व
इस कार्यक्रम के अंतर्गत पाँच प्रमुख घटकों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
- बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान: इसमें पढ़ने, लिखने, समझने तथा सामान्य गणितीय गणना करने की क्षमता विकसित की जाती है। इसका उद्देश्य दैनिक जीवन में साक्षरता का व्यावहारिक उपयोग सुनिश्चित करना है।
- महत्त्वपूर्ण जीवन कौशल: इसके अंतर्गत वित्तीय साक्षरता, डिजिटल साक्षरता, कानूनी जागरूकता, स्वास्थ्य, स्वच्छता, बाल देखभाल और शिक्षा से संबंधित जानकारी दी जाती है।
- बुनियादी शिक्षा: जो शिक्षार्थी औपचारिक शिक्षा पूरी नहीं कर पाए, उन्हें आवश्यक शैक्षिक ज्ञान प्राप्त करने और आगे सीखने के अवसर प्रदान किए जाते हैं।
- व्यावसायिक कौशल विकास: इस घटक का उद्देश्य लोगों को कामकाज और आजीविका से संबंधित उपयोगी कौशलों की जानकारी देना है, जिससे वे अपने जीवन में बेहतर अवसरों का लाभ उठा सकें।
- सतत शिक्षा: साक्षरता प्राप्त करने के बाद भी शिक्षार्थियों को निरंतर सीखने, अपनी जानकारी बढ़ाने और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
ULLAS – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएँ
- साक्षरता की नई परिभाषा: अब सिर्फ नाम लिखना या हस्ताक्षर करना साक्षरता नहीं है। इसके तहत बुनियादी पढ़ने-लिखने और गणित के साथ-साथ डिजिटल और वित्तीय साक्षरता (Financial & Digital Literacy) को शामिल किया गया है।
- स्वयंसेवा की भावना (Volunteerism): यह योजना पूरी तरह से ‘कर्तव्यबोध’ और जनभागीदारी पर आधारित है, जिसे एक नागरिक आंदोलन बनाया गया है।
- नारा (Slogan): इसका मुख्य उद्देश्य हर व्यक्ति को साक्षर बनाना है, जिसका नारा “जन-जन साक्षर” है।
- हाइब्रिड मोड (Hybrid Mode): इसकी पढ़ाई ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से होती है। शिक्षार्थियों और स्वयंसेवकों (VTs) का पंजीकरण ULLAS मोबाइल ऐप या पोर्टल पर होता है।
- स्कूल मुख्य केंद्र (School as Unit): योजना के कार्यान्वयन की मुख्य इकाई स्कूल है। इसके अलावा स्कूलों, पंचायत कार्यालयों, सामुदायिक भवनों और डाकघरों आदि में सामाजिक चेतना केंद्र बनाए जा सकते हैं।
- उम्र सीमा: यह 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी गैर-साक्षरों के लिए है।
- 27 भाषाओं में पाठ्यसामग्री (Primers): उल्लास की पढ़ाई के लिए किताबें हिंदी, अंग्रेजी, बंगाली, पंजाबी, उर्दू सहित 27 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध हैं।
- मूल्यांकन और प्रमाणपत्र (FLNAT): साल में दो बार राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) और DoSEL द्वारा संयुक्त रूप से साक्षरता परीक्षा (FLNAT) आयोजित की जाती है और पास होने पर सर्टिफिकेट दिया जाता है।
- प्राथमिकता (Priority Areas): इसमें महिलाओं, एससी/एसटी/ओबीसी/अल्पसंख्यकों, दिव्यांगजनों और प्रवासी मजदूरों को प्राथमिकता दी जाती है। साथ ही कम साक्षरता दर वाले और नीति आयोग के आकांक्षी जिलों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
ULLAS ऐप और डिजिटल माध्यम की भूमिका
ULLAS कार्यक्रम में डिजिटल संसाधनों का उपयोग शिक्षार्थियों और स्वयंसेवकों को जोड़ने तथा सीखने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए किया जाता है। डिजिटल माध्यमों से शिक्षण सामग्री, साक्षरता गतिविधियों और कार्यक्रम से संबंधित जानकारी तक पहुँच आसान हो सकती है।
हालाँकि, डिजिटल सुविधाओं की उपलब्धता और पंजीकरण की प्रक्रिया के लिए संबंधित आधिकारिक पोर्टल या शिक्षा विभाग के वर्तमान निर्देशों की जाँच करना आवश्यक है।
ULLAS कार्यक्रम का महत्त्व
भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में वयस्क साक्षरता सामाजिक विकास का एक महत्त्वपूर्ण आधार है। साक्षर व्यक्ति सरकारी योजनाओं की जानकारी बेहतर ढंग से समझ सकता है, बैंकिंग सेवाओं का उपयोग कर सकता है, डिजिटल लेन-देन में अधिक जागरूक रह सकता है और अपने बच्चों की शिक्षा में सहयोग दे सकता है।
यह कार्यक्रम महिलाओं, ग्रामीण समुदायों तथा शिक्षा से वंचित वयस्कों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है। इससे आत्मविश्वास, सामाजिक भागीदारी और जीवन में स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने में सहायता मिलती है।
ULLAS कार्यक्रम में कौन भाग ले सकता है?
इस कार्यक्रम का प्रमुख लक्षित समूह 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के ऐसे गैर-साक्षर वयस्क हैं, जिन्हें बुनियादी साक्षरता की आवश्यकता है।
इच्छुक व्यक्ति अपने क्षेत्र के विद्यालय, साक्षरता केंद्र, स्थानीय शिक्षा विभाग या संबंधित सरकारी प्राधिकरण से संपर्क कर सकते हैं। स्वयंसेवक भी स्थानीय स्तर पर शिक्षण गतिविधियों में योगदान देने के अवसरों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
ULLAS कार्यक्रम से संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्य
- कार्यक्रम का नाम: ULLAS – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम
- पूरा नाम: Understanding of Lifelong Learning for All in Society
- संबंधित मंत्रालय: शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार
- प्रमुख लक्षित आयु वर्ग: 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के गैर-साक्षर वयस्क
- आधार: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020
- कार्यक्रम की अवधि: वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2026-27
- मुख्य उद्देश्य: बुनियादी साक्षरता, जीवन कौशल और आजीवन शिक्षा को बढ़ावा देना
निष्कर्ष
ULLAS – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम भारत में वयस्क शिक्षा और आजीवन सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देने की एक महत्त्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य शिक्षा से वंचित लोगों को बुनियादी साक्षरता, डिजिटल जानकारी, वित्तीय समझ और जीवनोपयोगी कौशल प्रदान करना है।
इस कार्यक्रम की सफलता के लिए सरकार, शिक्षण संस्थानों, स्वयंसेवकों और समाज के सभी वर्गों की भागीदारी आवश्यक है। साक्षर नागरिक ही जागरूक, आत्मनिर्भर और समावेशी समाज के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: ULLAS का पूरा नाम क्या है?
उत्तर: ULLAS का पूरा नाम Understanding of Lifelong Learning for All in Society है।
प्रश्न 2: ULLAS नव भारत साक्षरता कार्यक्रम किस मंत्रालय की योजना है?
उत्तर: यह भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की योजना है।
प्रश्न 3: ULLAS कार्यक्रम किस आयु वर्ग के लिए है?
उत्तर: इसका प्रमुख लक्षित समूह 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के गैर-साक्षर वयस्क हैं।
प्रश्न 4: ULLAS कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य बुनियादी साक्षरता, संख्यात्मक ज्ञान, जीवन कौशल और आजीवन शिक्षा को बढ़ावा देना है।
प्रश्न 5: ULLAS कार्यक्रम किस शिक्षा नीति से संबंधित है?
उत्तर: यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है।
प्रश्न 6: ULLAS कार्यक्रम में कौन-से कौशल सिखाए जाते हैं?
उत्तर: इसमें बुनियादी पढ़ना-लिखना, गणना, वित्तीय और डिजिटल साक्षरता, कानूनी जागरूकता, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी तथा उपयोगी व्यावसायिक कौशल शामिल हैं।

